हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.62.10

मंडल 3 → सूक्त 62 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि । धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त् ॥ (१०)
हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जिन्होंने हमारी बुद्धि को प्रेरित किया. (१०)
We meditate on savita dev's superior brightness, which inspired our intellect. (10)