हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 1.2

अध्याय 1 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वसोः॑ प॒वित्र॑मसि॒ द्यौर॑सि पृथि॒व्यसि मात॒रिश्व॑नो घ॒र्मोऽसि वि॒श्वधा॑ऽअसि। प॒र॒मेण॒ धाम्ना॒ दृꣳह॑स्व॒ मा ह्वा॒र्मा ते॑ य॒ज्ञप॑तिर्ह्वार्षीत् ॥ (२)
हे मनुष्यो! आप वस्तुओं को पवित्र करने के माध्यम (बनाने वाले) हों. आप स्वर्गलोक, पृथ्वी, पालक, ऊष्मा व विश्वधारक हैं. आप अपने परम तेज से दृढ़ बनिए. आप के यज्ञपति (यज्ञ में मददगार) भी कठोर न हों. (२)
O men! You are the medium of sanctifying things. You are heaven, earth, spinach, heat and world holder. Be firm with your ultimate brilliance. Your yajnapati (helper in yajna) should also not be harsh. (2)