हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

अध्याय 21 के सभी मंत्र

यजुर्वेद अध्याय 21 के सभी मंत्र हिंदी अर्थ के साथ

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
इ॒मं मे॑ वरुण श्रु॒धी हव॑म॒द्या च॑ मृडय। त्वाम॑व॒स्युरा च॑के ॥ (१)
हे वरुण देव! हमारी प्रार्थना सुनने की कृपा करें. आज जो हम हवन कर रहे हैं, उस से हमें सुख प्रदान करें. हम अपनी रक्षा के लिए आप का आह्वान करते हैं. (१)
O Varun Dev! Please listen to our prayers. May we be blessed with the havan we are performing today. We call on you to protect us. (1)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
तत्त्वा॑ यामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वन्द॑मान॒स्तदाशा॑स्ते॒ यज॑मानो ह॒विर्भिः॑। अहे॑डमानो वरुणे॒ह बो॒ध्युरु॑शꣳस॒ मा न॒ऽआयुः॒ प्र मो॑षीः ॥ (२)
ये यजमान ब्रहमज्ञानमय ऋचाओं से आप की बंदना कर रहे हैं. आहुतियां अर्पित कर रहे हैं. उन से आप यजमान पर प्रसन्न होइए. बरुण देव बहुप्रशंसित व देव पूजित हैं. आप जाग्रत होइए और हमारी आयु क्षीण मत कीजिए. (२)
These hosts are worshiping you with brahmagyanic verses. Offerings are made. Be happy with them. Barun Dev is highly acclaimed and Dev Pujat. You wake up and don't underestimate our age. (2)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
त्वं नो॑ऽअग्ने॒ वरु॑णस्य वि॒द्वान् दे॒वस्य॒ हेडो॒ऽअव॑ यासिसीष्ठाः। यजि॑ष्ठो॒ वह्नि॑तमः॒ शोशु॑चानो॒ विश्वा॒ द्वेषा॑सि॒ प्र मु॑मुग्ध्य॒स्मत् ॥ (३)
हे अग्नि! आप विद्वान्‌ हैं. आप आहुतियों को देवताओं तक पहुंचाने बाले हैं. आप यज्ञ में पूजित, बहुत दीप्तिमान व पवित्र हैं. आप वरुण देव को हम पर प्रसन्न कराइए. हमारे सभी द्वेषियों को नष्ट करने की कृपा कीजिए. (३)
O agni! You are a scholar. You are the one who delivers the sacrifices to the gods. You are worshiped in yajna, very radiant and holy. Please varun dev on us. Please destroy all our malice. (3)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
स त्वं नो॑ऽअग्नेऽव॒मो भ॑वो॒ती नेदि॑ष्ठोऽअ॒स्याऽउ॒षसो॒ व्युड्टष्टौ।अव॑ यक्ष्व नो॒ वरु॑ण॒ꣳ ररा॑णो वी॒हि मृ॑डी॒कꣳ सु॒हवो॑ नऽएधि ॥ (४)
हे अग्नि! प्रातः अपने रक्षा साधनों सहित हमारे पास पधारिए. हमारी रक्षा करने व आहुतियों को देवताओं तक पहुंचाने की कृपा कीजिए. आप उन्हें तृप्ति दीजिए. आप अच्छी तरह बुलाने योग्य हैं. आप इस सुखदायक आहुति को स्वीकारने की कृपा कीजिए. (४)
O agni! Come to us in the morning with your defence equipment. Please protect us and deliver the sacrifices to the gods. You give them satisfaction. You are well called. Please accept this soothing sacrifice. (4)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
म॒हीमू॒ षु मा॒तर॑ꣳ सुव्र॒ताना॑मृ॒तस्य॒ पत्नी॒मव॑से हुवेम।तु॒वि॒क्ष॒त्राम॒जर॑न्तीमुरू॒ची सु॒शर्मा॑ण॒मदितिꣳ सु॒प्रणी॑तिम् ॥ (५)
अदिति देवी महामहिमाशालिनी, माता, सुव्रतों वाली, अमर, कभी वृद्ध नहीं होने वाली हैं, सुखदायिनी व नीतित्ञा हैं. हम अपनी रक्षा हेतु उन का आह्वान करते हैं. (५)
Aditi Devi is mahamahimashalini, mata, suvraton wali, immortal, never going to grow old, happy and moral. We call upon them to protect ourselves. (5)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
सु॒त्रामा॑णं पृथि॒वीं द्याम॑ने॒हस॑ꣳ सु॒शर्मा॑ण॒मदि॑तिꣳ सु॒प्रणी॑तिम्।दै॒वीं नाव॑ꣳ स्वरि॒त्रामना॑गस॒मस्र॑वन्ती॒मा रु॑हेमा स्व॒स्तये॑ ॥ (६)
अदितिमाता भलीभांति रक्षा करने वाली, पृथ्वीलोक से स्वर्गलोक तक विस्तार वाली, अत्यंत सुखदायिनी, अच्छा आसरा (आश्रय) देने वाली, दोषरहित, मृत्यु का भय दूर करने वाली हैं. अपनेआप चलने वाली, बिना छेदों वाली इस नौका में आप की कृपा से हम आरोहण करें. हम अपने कल्याण के लिए उस पर चढ़ते हैं. (६)
Aditimata is a well-protected, extending from earth to heaven, very pleasant, giving good shelter, flawless, removing the fear of death. Let us climb with your grace in this boat with no holes, which runs automatically, without holes. We climb on it for our welfare. (6)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
सु॒नाव॒मा रु॑हेय॒मस्र॑वन्ती॒मना॑गसम्। श॒तारि॑त्रा स्वस्तये॑ ॥ (७)
यह नाव दोष रहित, बिना छेदों वाली, अपनेआप चलने वाली व सैकड़ों शत्रुओं से त्राण करने वाली है. हम अपने कल्याण के लिए इस पर आरूढ़ (चढ़ने) होने की कृपा करें. (७)
This boat is flawless, without holes, running on its own and is prone to hundreds of enemies. May we be pleased to climb it for our welfare. (7)

यजुर्वेद (अध्याय 21)

यजुर्वेद:
आ नो॑ मित्रावरुणा घृ॒तैर्गव्यू॑तिमुक्षतम्। मध्वा॒ रजा॑सि सुक्रतू ॥ (८)
हे मित्र व वरुण देव! आप हमारे यहां गाय के घी से सीँचिए. आप हमारे खेतों को मधुर अमृत से सींचिए. (८)
O friend B Varun Dev! You irrigate us with cow's ghee here. You irrigate our fields with sweet nectar. (8)
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