अथर्ववेद (कांड 1)
इ॒हैव हव॒मा या॑त म इ॒ह सं॑स्रावणा उ॒तेमं व॑र्धयता गिरः । इ॒हैतु॒ सर्वो॒ यः प॒शुर॒स्मिन्ति॑ष्ठतु॒ या र॒यिः ॥ (२)
हे देवो! आप सब को त्याग कर मेरे इस यज्ञ में पधारें. इस में आज्य आदि का होम है. हे स्तुतियों द्वारा बढ़ाए जाते हुए देवो! आप इस यजमान की वृद्धि करें. हे देवो! हमारी स्तुतियों को सुन कर प्रसन्न हुए आप की कृपा से हमारे घर में गाय, अश्व आदि पशु एवं अन्य संपत्ति निवास करे. (२)
O God! Leave all of you and come to this yagna of mine. In this, there is a home of ajya etc. O Gods, enhanced by eulogies! You increase this host. O God! Pleased to hear our praises, by your grace, live in our house with animals and other property like cow, horse etc. (2)