हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
ये ऽमा॑वा॒स्यां॑३ रात्रि॑मु॒दस्थु॑र्व्रा॒जम॒त्त्रिणः॑ । अ॒ग्निस्तु॒रीयो॑ यातु॒हा सो अ॒स्मभ्य॒मधि॑ ब्रवत् ॥ (१)
मनुष्यों का भक्षण करने वाले जो राक्षस अमावस्या की अंधेरी रात में इधर उधर घूमते हैं. चौथे अग्नि देव उन राक्षसों एवं चोरों का संहार कर के हमारी रक्षा करें. (१)
The demons who eat humans roam around in the dark night of Amavasya. May the fourth agni god kill those demons and thieves and protect us. (1)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
सीसा॒याध्या॑ह॒ वरु॑णः॒ सीसा॑या॒ग्निरुपा॑वति । सीसं॑ म॒ इन्द्रः॒ प्राय॑च्छ॒त्तद॒ङ्ग या॑तु॒चात॑नम् ॥ (२)
वरुण देव ने फेन के विषय में कहा है. सीसे जस्ते के विषय में अग्नि ने भी यही कहा है. परम ऐश्वर्ययुक्त इंद्र ने मुझे सीसा प्रदान किया है. इंद्र ने कहा है कि हे प्रिय! यह सीसा राक्षसों का संहार करने वाला है. (२)
Varun Dev has said about fen. Agni has also said the same about lead zinc. Indra, the supreme opulence, has given me lead. Indra has said, "O dear! This lead is going to kill demons. (2)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
इ॒दं विष्क॑न्धं सहत इ॒दं बा॑धते अ॒त्त्रिणः॑ । अ॒नेन॒ विश्वा॑ ससहे॒ या जा॒तानि॑ पिशा॒च्याः ॥ (३)
यह सीसा राक्षस, पिशाच आदि द्वारा डाले जाने वाले विचघ्नों को समाप्त करने वाला है. यह मनुष्यों का भक्षण करने वाले राक्षसों को नष्ट करता है. मैं इस सीसे के द्वारा सभी राक्षसो को पराजित करता हूं. वे राक्षस पिशाची से उत्पन्न हैं. (३)
This lead is going to end the distractions cast by monsters, vampires, etc. It destroys the demons that feed humans. I defeat all the demons with this lead. They are born from the demon Pishachi. (3)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
यदि॑ नो॒ गां हंसि॒ यद्यश्वं॒ यदि॒ पूरु॑षम् । तं त्वा॒ सीसे॑न विध्यामो॒ यथा॒ नो ऽसो॒ अवी॑रहा ॥ (४)
हे शत्रु! यदि तू हमारी गायों, घोड़ों एवं सहायता करने वाले सेवकों की हत्या करता है तो मैं सीसे से तुझे मारूंगा. तू मेरे वीरों की हत्या नहीं कर सकेगा. (४)
O enemy! If you kill our cows, horses and helping servants, I will kill you with lead. You will not be able to kill my heroes. (4)