हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.22.4

कांड 1 → सूक्त 22 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
सुके॑षु ते हरि॒माणं॑ रोप॒णाका॑सु दध्मसि । अथो॒ हारि॑द्रवेषु ते हरि॒माणं॒ नि द॑ध्मसि ॥ (४)
हे रोगी पुरुष! हम तेरे शरीर में रहने वाले रोग से उत्पन्न हरे रंग को स्रोतों में तथा रोपणक नामक पक्षियों में स्थापित करते हैं. हम तेरे हलदी के समान पीले रंग को गोपीतनक नामक पीले रंग के पक्षियों में स्थापित करते हैं. (४)
O sick man! We establish the green color produced by the disease living in your body in the sources and in the birds called planters. We establish yellow color like your haldi in yellow birds called Gopitanak. (4)