अथर्ववेद (कांड 1)
श्या॒मा स॑रूपं॒कर॑णी पृथि॒व्या अध्युद्भृ॑ता । इ॒दमू॑ षु॒ प्र सा॑धय॒ पुना॑ रू॒पाणि॑ कल्पय ॥ (४)
हे काले रंग की एवं अपने संपर्क में आने वाले को अपने समान बना देने वाली ओषधि! तू आसुरी माया द्वारा धरती से उत्पन्न की गई है. तू कुष्ठ रोग से आक्रांत इस अंग को पुनः पहले के समान रंग वाला बना दे. (४)
O black medicine that makes those who come in contact with you like you! You have been created from the earth by devilish Maya. You make this organ affected by leprosy the same color as before. (4)