अथर्ववेद (कांड 1)
यू॒यं नः॑ प्रवतो नपा॒न्मरु॑तः॒ सूर्य॑त्वचसः । शर्म॑ यच्छाथ स॒प्रथः॑ ॥ (३)
हे सूर्य द्वारा पृथ्वी से सोखे हुए जल को न गिराने वाले पर्जन्य देव! हे सात गणों वाले मरुत् देव! आप सब सूर्य के समान तेज वाले हैं. आप सब हमारा विस्तार से कल्याण करें. (३)
O God who does not drop the water absorbed from the earth by the sun! O Merciful God of seven ganas! You are all as bright as the sun. May you all benefit us in detail. (3)