हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.29.4

कांड 1 → सूक्त 29 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
अ॑भीव॒र्तो अ॑भिभ॒वः स॑पत्न॒क्षय॑णो म॒णिः । रा॒ष्ट्राय॒ मह्यं॑ बध्यतां स॒पत्ने॑भ्यः परा॒भुवे॑ ॥ (४)
शत्रुओं की पराजय करने वाली एवं राक्षसों का विनाश करने वाली अभीवर्त मणि राष्ट्र की समृद्धि और शत्रुओं के विनाश के लिए मेरे हाथ में बांधो. (४)
Tie the abhavarta gem, which defeats the enemies and destroys the demons, in my hand for the prosperity of the nation and the destruction of the enemies. (4)