अथर्ववेद (कांड 1)
ये वो॑ देवाः पि॒तरो॒ ये च॑ पु॒त्राः सचे॑तसो मे शृणुते॒दमु॒क्तम् । सर्वे॑भ्यो वः॒ परि॑ ददाम्ये॒तं स्व॒स्त्ये॑नं ज॒रसे॑ वहाथ ॥ (२)
हे देवो! आप के जो पितर एवं पुत्र हों, वे भी इस पुरुष के विषय में की गई मेरी प्रार्थना पर ध्यान दें. दीर्घ आयु की कामना करने वाले इस पुरुष को मैं आप सब को सौंपता हूं. इस की वृद्धावस्था तक आप इस का कल्याण करें. (२)
O God! Your fathers and sons should also pay attention to my prayer about this man. I hand over to all of you this man who wishes for a long life. You should do it till its old age. (2)