अथर्ववेद (कांड 1)
येषां॑ प्रया॒जा उ॒त वा॑नुया॒जा हु॒तभा॑गा अहु॒ताद॑श्च दे॒वाः । येषां॑ वः॒ पञ्च॑ प्र॒दिशो॒ विभ॑क्ता॒स्तान्वो॑ अ॒स्मै स॑त्र॒सदः॑ कृणोमि ॥ (४)
जिस देव के निमित्त पंचयाग किए जाते हैं, वह अग्नि देव; जिन देवों के निमित्त बाद वाले तीन यज्ञ किए जाते हैं, वह इंद्र आदि देव; जो बलि का अपहरण करते हैं, दिशाओं के स्वामी देव हैं, इन सब को एवं इन के अतिरिक्त जो देव हैं, उन को भी मैं इस दीर्घ आयु चाहने वाले पुरुष के समीप बैठने के लिए नियुक्त करता हूं. (४)
The god for whom panchayag is performed is agni dev; The gods for whom the latter three yagyas are performed are Indra Adi Dev; Those who kidnap bali, the swami of directions, all these and those who are gods besides them, I also appoint them to sit near this man who wants long life. (4)