हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अ॒म्बयो॑ य॒न्त्यध्व॑भिर्जा॒मयो॑ अध्वरीय॒ताम् । पृ॑ञ्च॒तीर्मधु॑ना॒ पयः॑ ॥ (१)
यज्ञ करने के इच्छुक जन अपनी माताओं और बहनों के समान जल, सोमरस, दूध एवं घृत आदि यज्ञ सामग्री ले कर आते हैं. (१)
People who want to perform yajna bring yagya material like water, someras, milk and ghee etc. like their mothers and sisters. (1)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अ॒मूर्या उप॒ सूर्ये॒ याभि॑र्वा॒ सूर्यः॑ स॒ह । ता नो॑ हिन्वन्त्वध्व॒रम् ॥ (२)
जो जल सूर्य मंडल में स्थित है अथवा सूर्य जिस जल के साथ स्थित है, वह जल हमारे यज्ञ को फल देने में समर्थ बनाए. (२)
The water which is located in the sun system or the water with which the sun is located, that water should be able to give fruits to our yajna. (2)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अ॒पो दे॒वीरुप॑ ह्वये॒ यत्र॒ गावः॒ पिब॑न्ति नः । सिन्धु॑भ्यः॒ कर्त्वं॑ ह॒विः ॥ (३)
मैं स्वच्छ एवं देवता रूप जलों का आह्वान करता हूं. जल से पूर्ण जलाशयों अर्थात्‌ नदियों और तालाबों में हमारी गाएं जल पीती हैं. (३)
I call for clean and deity waters. Our cows drink water in water-filled reservoirs i.e. rivers and ponds. (3)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अ॒प्स्व॑१न्तर॒मृत॑म॒प्सु भे॑ष॒जम् । अ॒पामु॒त प्रश॑स्तिभि॒रश्वा॒ भव॑थ वा॒जिनो॒ गावो॑ भवथ वा॒जिनीः॑ ॥ (४)
जलों में अमृत है. जलों में ओषधियां निवास करती हैं. इन जलों के प्रभाव से हमारे घोड़े बलवान बनें, हमारी गाएं शक्ति संपन्न बनें. (४)
There is nectar in the waters. Medicines reside in waters. With the effect of these waters, our horses become strong, our cows become powerful. (4)