हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.7.3

कांड 1 → सूक्त 7 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
वि ल॑पन्तु यातु॒धाना॑ अ॒त्त्रिणो॒ ये कि॑मी॒दिनः॑ । अथे॒दम॑ग्ने नो ह॒विरिन्द्र॑श्च॒ प्रति॑ हर्यतम् ॥ (३)
हे अग्नि! आप और परम ऐश्वर्य वाले इंद्र, हमारे दिए गए हवि को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करें. राक्षस, सब का भक्षण करने वाले दस्यु एवं इधरउधर घूमने वाले दुष्ट जन नष्ट हो जाएं. (३)
O agni! May you and Indra of supreme opulence gladly accept our given havi. Demons, bandits who eat everyone and evil people roaming around should be destroyed. (3)