हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.7.5

कांड 1 → सूक्त 7 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
पश्या॑म ते वी॒र्यं॑ जातवेदः॒ प्र णो॑ ब्रूहि यातु॒धाना॑न्नृचक्षः । त्वया॒ सर्वे॒ परि॑तप्ताः पु॒रस्ता॒त्त आ य॑न्तु प्रब्रुवा॒णा उपे॒दम् ॥ (५)
हे सब को जानने वाले अग्नि! हम आप का पराक्रम देखें. हे उपासना के योग्य अग्नि! हमारी इच्छानुसार राक्षसों से कहिए कि वे हमें दुःख न दें. आप के द्वारा सताए हुए राक्षस अपना परिचय देते हुए हमारी शरण में आएं. (५)
O agni that knows all! Let us see your might. O agni worthy of worship! Tell the demons as we wish not to hurt us. The demons persecuted by you should come to our shelter, introducing themselves. (5)