हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.30

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
व॒शा द्यौर्व॒शा पृ॑थि॒वी व॒शा विष्णुः॑ प्र॒जाप॑तिः । व॒शाया॑ दु॒ग्धम॑पिबन्त्सा॒ध्या वस॑वश्च ये ॥ (३०)
वशा गौ द्यौ, पृथ्वी, विष्णु और प्रजापति हैं. जो साध्य और वायु हैं, उन्होंने वशा गौ का दूध पिया. (३०)
Vasha gau dyau, prithvi, vishnu and prajapati. Those who are sadhya and vayu drank the milk of Vasha gau. (30)