हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.3.21

कांड 10 → सूक्त 3 → मंत्र 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
यथा॒ यशः॑ सोमपी॒थे म॑धुप॒र्के यथा॒ यशः॑ । ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु । तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा ॥ (२१)
जिस प्रकार सोमपीथ और मधुपर्क नामक यज्ञ क्रियाओं के करने से यश प्राप्त होता है, उसी प्रकार वरण वृक्ष से निर्मित मणि मुझे यश और ऐश्वर्य प्रदान करे. (२१)
Just as one gets fame by performing yagya kriyas called Sompith and Madhupark, in the same way, may the gem made from the varan tree give me fame and opulence. (21)