अथर्ववेद (कांड 10)
दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्भा॒ग स्थ॑ । अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त । प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये ॥ (१४)
हे जलो! तुम सविता देव के भाग हो. तुम जलों का वीर्य एवं दिव्य तेज हम में धारण करो. लोक कल्याण के निमित्त तुम हम में प्रजापति का तेज स्थित करो. (१४)
O burn! You are part of Savita Dev. You should put the semen of water and divine glory in us. For the sake of public welfare, you should place the glory of Prajapati in us. (14)