हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.5.45

कांड 10 → सूक्त 5 → मंत्र 45 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
यत्ते॒ अन्नं॑ भुवस्पत आक्षि॒यति॑ पृथि॒वीमनु॑ । तस्य॑ न॒स्त्वं भु॑वस्पते सं॒प्रय॑च्छ प्रजापते ॥ (४५)
हे पृथ्वी के स्वामी! तुम्हारा जो अन्न पृथ्वी पर बिखरा हुआ है, वह पृथ्वी के स्वामी प्रजापति हमें प्रदान करें. (४५)
O Swami of the earth! May the swami of the earth, Prajapati, give us your food which is scattered on the earth. (45)