हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.2.20

कांड 13 → सूक्त 2 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
प्र॒त्यङ्दे॒वानां॒ विशः॑ प्र॒त्यङ्ङुदे॑षि॒ मानु॑षीः । प्र॒त्यङ्विश्वं॒ स्वर्दृ॒शे ॥ (२०)
हे सूर्य देव! तुम सभी मानवी और दिव्य प्रजाओं के सामने प्रकट होते हो. तुम सभी को देखने के लिए प्रत्यक्ष रूप से उदय होते हो. (२०)
O Sun God! You appear before all human and divine subjects. You rise directly to see everyone. (20)