अथर्ववेद (कांड 13)
रोच॑से दि॒वि रोच॑से अ॒न्तरि॑क्षे॒ पत॑ङ्ग पृथि॒व्यां रो॑चसे॒ रोच॑से अ॒प्स्वन्तः । उ॒भा स॑मु॒द्रौ रुच्या॒ व्यापिथ दे॒वो दे॑वासि महि॒षः स्व॒र्जित् ॥ (३०)
हे सूर्य देव! तुम स्वर्ग में, अंतरिक्ष में, पृथ्वी पर तथा जल में दमकते हो. तुम अपने तेज से पूर्व और पश्चिम सागरों को व्याप्त कर लेते हो. (३०)
O Sun God! You shine in heaven, in space, on earth and in water. You pervade the east and west seas with your glory. (30)