हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.5.6

कांड 13 → सूक्त 5 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
स सर्व॑स्मै॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (६)
वह असाधारण एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म ही है, यह सब उसे ही प्राप्त होता है. (६)
He is the extraordinary ekavrut i.e. Brahman, all this he gets. (6)