हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.7.12

कांड 13 → सूक्त 7 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
स य॒ज्ञस्तस्य॑ य॒ज्ञः स य॒ज्ञस्य॒ शिर॑स्कृ॒तम् ॥ (१२)
यज्ञ उन का है और वे यज्ञ के हैं एवं यज्ञ के शीर्ष रूप हैं. (१२)
Yajna belongs to them and they belong to yajna and are the top form of yajna. (12)