अथर्ववेद (कांड 15)
ऐनं॑ प्रि॒यंग॑च्छति प्रि॒यः प्रि॒यस्य॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (७)
यह कहने वाला कि जैसा तुम्हारा वक्ष है वैसा ही हो, अपने हेतु वक्ष को खोल लेता है. (७)
The one who says that your chest is as it is, opens the chest for himself. (7)
कांड 15 → सूक्त 11 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation