हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.11.9

कांड 15 → सूक्त 11 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
ऐनं॒ वशो॑ गच्छतिव॒शी व॒शिनां॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (९)
इस बात को जानने वाला वश को प्राप्त करता है. वह वश में करने वालों को भी वश में कर लेता है. (९)
The one who knows this receives control. He also subdues those who subdue them. (9)