अथर्ववेद (कांड 15)
य एवापरिमिताः पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (१०)
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य अनेक रातों तक निवास करता है तो उस के फल के रूप में वह गृहस्थ अनेक पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (१०)
कांड 15 → सूक्त 13 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation