अथर्ववेद (कांड 15)
कर्षेदेनं न चैनं कर्षत्.. (१२)
जिस के घर अपनेआप को व्रात्य बताने वाला कोई अब्रात्य आए तो वया गृहस्थ उसे अपने घर से भगा दे. नहीं, उस को भी भगाना नहीं चाहिए. (१२)
कांड 15 → सूक्त 13 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation