हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.13.14

कांड 15 → सूक्त 13 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
तस्या॑मे॒वास्य॒तद्दे॒वता॑यां हु॒तं भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१४)
जो इस बात को जानता है, उस की आहुति देवताओं के लिए दी जाने पर उत्तम आहुति बन जाती है. (१४)
He who knows this, his sacrifice becomes the best sacrifice when given to the gods. (14)