अथर्ववेद (कांड 15)
व॑षट्का॒रेणा॑न्ना॒देनान्न॑मत्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१८)
इस बात को जानने वाला वषट्कार रूप अन्नाद के द्वारा अन्न का भक्षण करता है. (१८)
The shattankar who knows this eats food through Roop Annad. (18)
कांड 15 → सूक्त 14 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation