हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.14.5

कांड 15 → सूक्त 14 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
स यत्प्र॒तीचीं॒दिश॒मनु॒ व्यच॑ल॒द्वरु॑णो॒ राजा॑ भू॒त्वानु॒व्यचलद॒पोऽन्ना॒दीः कृ॒त्वा ॥ (५)
जब वह पश्चिम दिशा की ओर चला, तब वह जल को अन्नाद बताता हुआ वरुण बन कर गतिशील हुआ. (५)
When he walked towards the west direction, he moved as Varuna, describing the water as Annad. (5)