अथर्ववेद (कांड 15)
तस्य॒व्रात्य॑स्य । योऽस्य॑ द्वि॒तीयः॑ प्रा॒णः प्रौढो॒ नामा॒सौ स आ॑दि॒त्यः ॥ (४)
इस व्रात्य का द्वितीय प्रौढ़ प्राण आदित्य है. (४)
The second adult life of this vratya is Aditya. (4)
कांड 15 → सूक्त 15 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation