अथर्ववेद (कांड 15)
तस्य॒व्रात्य॑स्य । यदा॑दि॒त्यम॑भिसंवि॒शन्त्य॑मावा॒स्यां चै॒व तत्पौ॑र्णमा॒सीं च॑ ॥ (९)
ह अमापस्या और पूर्णिमा आदित्य में प्रवेश करती हैं. आहुति ही इन का अविनाशी होना. (९)
H Amapasya and Purnima enter Aditya. Sacrifice is the imperishable of them. (9)