हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.17.9

कांड 15 → सूक्त 17 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
तस्य॒व्रात्य॑स्य । यदा॑दि॒त्यम॑भिसंवि॒शन्त्य॑मावा॒स्यां चै॒व तत्पौ॑र्णमा॒सीं च॑ ॥ (९)
ह अमापस्या और पूर्णिमा आदित्य में प्रवेश करती हैं. आहुति ही इन का अविनाशी होना. (९)
H Amapasya and Purnima enter Aditya. Sacrifice is the imperishable of them. (9)