हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.4.12

कांड 15 → सूक्त 4 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
शा॑र॒दावे॑नं॒मासा॒वुदी॑च्या दि॒शो गो॑पायतः श्यै॒तं च॑ नौध॒सं चानु॑ तिष्ठतो॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१२)
जो यह बात जानता है, उत्तर दिशा की ओर से उस की रक्षा शरद ऋतु के दो महीने करते हैं तथा नौधस और श्येत उस के अनुकूल बन जाते हैं. (१२)
Whoever knows this, he is protected from the north direction for two months of autumn and Naudhas and Shyt become favorable to him. (12)