अथर्ववेद (कांड 15)
दिते॑श्च॒ वै सोऽदि॑ते॒श्चेडा॒याश्चे॑न्द्रा॒ण्याश्च॑ प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२१)
जो इस बात को जानता है. वह पुरुष इडा, इंद्राणी, दिति और अदिति का प्रिय धाम बनता है. (२१)
Who knows this. The man becomes the beloved abode of Ida, Indrani, Diti and Aditi. (21)