अथर्ववेद (कांड 15)
वि॒राज॑श्च॒ वै ससर्वे॑षां च दे॒वानां॒ सर्वा॑सां च दे॒वता॑नां प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२३)
जो इस बात को जानता है, वह विराट और सभी देवों का प्रिय धाम होता है. (२३)
The one who knows this is the beloved abode of Virat and all the gods. (23)