अथर्ववेद (कांड 15)
स विशः॒सब॑न्धू॒नन्न॑म॒न्नाद्य॑म॒भ्युद॑तिष्ठत् ॥ (२)
वह प्रजाओं के, बंधुओं के अन्न के और खानपान के अनुकूल व्यवहार करने लगा. (२)
He began to behave according to the food and food of the people, brothers. (2)
कांड 15 → सूक्त 8 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation