हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 16.2.4

कांड 16 → सूक्त 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
सु॒श्रुतौ॒कर्णौ॑ भद्र॒श्रुतौ॒ कर्णौ॑ भ॒द्रं श्लोकं॑ श्रूयासम् ॥ (४)
मेरे कान भलीभांति तथा निकट से सुनना कभी न छीढ़ें. मेरे नेत्र गरुड़ के समान हों तथा सदैव देखने की शक्ति से सम्पन्न रहें. (४)
Never let my ears smell good and closely listening. May my eyes be like garuda and always be full of the power to see. (4)