अथर्ववेद (कांड 16)
ऋषी॑णांप्रस्त॒रोऽसि॒ नमो॑ऽस्तु॒ दैवा॑य प्रस्त॒राय॑ ॥ (६)
तू ऋषियों का पाषाण है. तुझ देवरूप पाषाण को मैं नमस्कार करता हूं. (६)
You are the stone of sages. I salute your god-form stone. (6)
कांड 16 → सूक्त 2 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation