हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
नाभि॑र॒हंर॑यी॒णां नाभिः॑ समा॒नानां॑ भूयासम् ॥ (१)
मैं धनों की नाभि के समान बनूं. जो पुरुष मेरे समान हैं, उन में भी मैं नाभि रूप बनूं. (१)
Let me be like the navel of wealth. Let me also be the navel form in men who are like me. (1)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
स्वा॒सद॑सि सू॒षाअ॒मृतो॒ मर्त्ये॒श्वा ॥ (२)
शरेष्ठ उषा मरण धर्मा मनुष्यों में अमृत से युक्त है तथा सुंदरता के साथ प्रतिष्ठित होती है. (२)
Shreshtha Usha is endowed with nectar in the dying dharma and is revered with beauty. (2)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
मा मां प्रा॒णोहा॑सी॒न्मो अ॑पा॒नोऽव॒हाय॒ परा॑ गात् ॥ (३)
प्राण वायु मेरा त्याग न करे. अपान वायु भी मुझे छोड़ कर न जाए. (३)
Let the air of life not abandon me. Don't let your air leave me. (3)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
सूर्यो॒ माह्नः॑पात्व॒ग्निः पृ॑थि॒व्या वा॒युर॒न्तरि॑क्षाद्य॒मो म॑नु॒ष्येभ्यः॒ सर॑स्वती॒पार्थि॑वेभ्यः ॥ (४)
सूर्य दिन में मेरी रक्षा करें. अग्नि पृथ्वी पर मेरी रक्षा करे. वायु अंतरिक्ष में, यम मनुष्यों से तथा सरस्वती पार्थिव पदार्थो से मेरी रक्षा करने वाली हैं. (४)
Protect me during the sun day. May agni protect me on earth. In air space, Yama is the protector of me from humans and Saraswati from earthly substances. (4)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
प्राणा॑पानौ॒ मामा॑ हासिष्टं॒ मा जने॒ प्र मे॑षि ॥ (५)
प्राण और अपान वायु मेरा त्याग न करें. मैं सदा प्रसन्न रहूं. (५)
Do not give up my life and your air. May I always be happy. (5)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
स्व॒स्त्यद्योषसो॑ दो॒षस॑श्च॒ सर्व॑ आपः॒ सर्व॑गणो अशीय ॥ (६)
उषा काल और रात्रि के द्वारा मंगल हो. मैं सभी गणों और जलों का उपयोग करने वाला बनूं. (६)
Mars is done through usha kaal and night. Let me be the one who uses all the ganas and waters. (6)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
शक्व॑री स्थप॒शवो॒ मोप॑ स्थेषुर्मि॒त्रावरु॑णौ मे प्राणापा॒नाव॒ग्निर्मे॒ दक्षं॑ दधातु ॥ (७)
हे पशुओ! तुम भुजाओं वाले बनो तथा मेरे पास स्थित रहो. वरुण देव मेरी प्राण और अपान वायु को पोषित करें. अग्नि देव मेरे बल को दृढ़ करें. (७)
O animals! You be armed and be with me. May Varun Dev nourish my life and your air. May Agni Dev strengthen my strength. (7)