हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.12.8

कांड 2 → सूक्त 12 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 12
आ द॑धामि ते प॒दं समि॑द्धे जा॒तवे॑दसि । अ॒ग्निः शरी॑रं वेवे॒ष्ट्वसुं॒ वागपि॑ गच्छतु ॥ (८)
हे शत्रु! मैं जलती हुई अग्नि में तेरे कटे हुए चरणों के साथ तेरे पैरों की धूल फेंकता हूं. अग्नि तेरे शरीर में प्रवेश कर के तेरे सारे अंगों में फैल जाए. तेरी वाणी और प्राण भी समाप्त हो जाएं. (८)
O enemy! I throw the dust of your feet with your cut feet in the burning agni. Let agni enter your body and spread to all your organs. May your speech and soul also end. (8)