हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.13.4

कांड 2 → सूक्त 13 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
एह्यश्मा॑न॒मा ति॒ष्ठाश्मा॑ भवतु ते त॒नूः । कृ॒ण्वन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा आयु॑ष्टे श॒रदः॑ श॒तम् ॥ (४)
हे ब्रह्मचारी! तू आ और अपने दाहिने पैर से पत्थर पर आक्रमण कर. तेरा शरीर पत्थर के समान दृढ़ हो. समस्त देव तेरी आयु सौ वर्ष की बनाएं. (४)
O brahmachari! Come and attack the stone with your right foot. May your body be as strong as a stone. May all gods make your age a hundred years old. (4)