हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.14.5

कांड 2 → सूक्त 14 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
यदि॒ स्थ क्षे॑त्रि॒याणां॒ यदि॑ वा॒ पुरु॑षेषिताः । यदि॒ स्थ दस्यु॑भ्यो जा॒ता नश्य॑ते॒तः स॒दान्वाः॑ ॥ (५)
हे पिशाचियो! यदि तुम मातापिता के शरीर से आए हुए कोढ़, पागलपन, संग्रहणी आदि का कारण बनी हुई हो अथवा तुम्हें मेरे शत्रुओं ने यहां भेजा है, यदि तुम चोर आदि के समीप से प्रकाश में आई हो, तो तुम सब यहां से भाग जाओ. (५)
O vampires! If you are the cause of leprosy, madness, collectage, etc. from the body of the parents or you have been sent here by my enemies, if you have come to light from near the thief etc., then you all run away from here. (5)