अथर्ववेद (कांड 2)
सूर्य॒ चक्षु॑षा मा पाहि॒ स्वाहा॑ ॥ (३)
सूर्य रूप देखने वाली इंद्रिय आंख के द्वारा मेरी रक्षा करे. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (३)
Protect me through the sense eye that sees the form of the sun. This havan is well done. (3)
कांड 2 → सूक्त 16 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation