हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.26.3

कांड 2 → सूक्त 26 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 26
सं सं स्र॑वन्तु प॒शवः॒ समश्वाः॒ समु॒ पूरु॑षाः । सं धा॒न्य॑स्य॒ या स्फा॒तिः सं॑स्रा॒व्ये॑ण ह॒विषा॑ जुहोमि ॥ (३)
गाय आदि पशु, घोड़े, सेवक आदि पुरुष तथा गेहूं, जौ आदि अन्नों की वृद्धि मेरे पास आए. इस के निमित्त मैं घृत से हवन करता हूं. (३)
Animals like cows, horses, servants etc. men and wheat, barley etc. came to me. For this reason, I perform havan with ghee. (3)