अथर्ववेद (कांड 2)
आ क्र॑न्दय धनपते व॒रमाम॑नसं कृणु । सर्वं॑ प्रदक्षि॒णं कृ॑णु॒ यो व॒रः प्र॑तिका॒म्यः॑ ॥ (६)
हे धनपति कुबेर! पति के द्वारा यह कहलवाओ कि यह कन्या मेरी पत्नी बने. इस वर को कन्या की ओर अभिमुख करो तथा सभी प्राणियों को इस के विवाह के अनुकूल कार्य करने वाला बनाओ. यह कन्या अपना मनचाहा पति प्राप्त करे. (६)
O Rich Kubera! Make your husband say that this girl should become my wife. Turn this groom towards the girl and make all beings working according to her marriage. This girl should get her desired husband. (6)