हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.4.6

कांड 2 → सूक्त 4 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
कृ॑त्या॒दूषि॑र॒यं म॒णिरथो॑ अराति॒दूषिः॑ । अथो॒ सह॑स्वान् जङ्गि॒डः प्र ण॒ आयुं॑षि तारिषत् ॥ (६)
यह मणि दूसरों के द्वारा किए गए जादूटोने से उत्पन्न पीड़ा की निवारक एवं शत्रुओं को नष्ट करने वाली है. शक्ति संपन्न यह जंगिड़ मणि हमारी आयु को बढ़ाए. (६)
This gem is a deterrent to the suffering caused by witchcraft done by others and destroys enemies. This powerful jangid mani should increase our life. (6)