हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.102.1

कांड 20 → सूक्त 102 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 102
ई॒लेन्यो॑ नम॒स्यस्ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तः । सम॒ग्निरि॑ध्यते॒ वृषा॑ ॥ (१)
अन्ने स्तुतियों और नमस्कारों के योग्य हैं. कामनाओं की वर्षा करने वाले एवं दर्शनीय हैं. अग्नि अपने धूम को तिरछा करते हुए प्रज्वलित होते हैं. (१)
He is worthy of praises and greetings. Those who shower wishes and are visible. Agni ignites, skewing its smoke. (1)