हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.124.6

कांड 20 → सूक्त 124 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 124
प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नय॒ञ्छची॑भि॒रादित्स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन् । अ॒या वाजं॑ दे॒वहि॑तं सनेम॒ मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑ ॥ (६)
वे देव अपने बल से सूर्य को सब के सामने उदय करते हैं. उन्होंने पृथ्वी को हवियों से युक्त किया है. देवताओं के सेवक हम उन्हीं के द्वारा अन्न प्राप्त करें तथा वीरों से सुसंगत रहते हुए सौ वर्ष की आयु प्राप्त करें. (६)
Those gods raise the sun in front of everyone with their strength. They have filled the earth with havis. We, servants of the gods, should get food through them and attain the age of 100 years while staying in harmony with the heroes. (6)