हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.127.13

कांड 20 → सूक्त 127 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 127
नेमा इ॑न्द्र॒ गावो॑ रिष॒न्मो आ॒सां गोप॑ रीरिषत् । मासा॑म॒मित्र॒युर्ज॑न॒ इन्द्र॒ मा स्ते॒न ई॑शत ॥ (१३)
हे इंद्र! ये गाएं नष्ट न हों. इन का पालन करने वाला भी हिंसित न हो. इन पर शत्रु और चोर का कोई प्रभाव न पड़े. (१३)
O Indra! These cows should not be destroyed. Even those who follow them should not be violent. There should be no effect of enemy and thief on them. (13)