अथर्ववेद (कांड 20)
अकु॑प्यन्तः॒ कुपा॑यकुः ॥ (८)
पृथ्वी का मर्म न जानने वाला क्रोधित हो गया. (८)
The one who did not know the essence of the earth became angry. (8)
कांड 20 → सूक्त 130 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation