हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.139.5

कांड 20 → सूक्त 139 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 139
यद॒प्सु यद्वन॒स्पतौ॒ यदोष॑धीषु पुरुदंससा कृ॒तम् । तेन॑ माविष्टमश्विना ॥ (५)
हे अश्विनीकुमारो! जल में, ओषधियों तथा वनस्पतियों में जो कर्म छिपे हुए हैं, उन से मुझे संपन्न बनाओ. (५)
O Ashwinikumaro! Make me endowed with the deeds that are hidden in the water, in the medicines and in the vegetation. (5)